प्यारी बहना
By Rashmi Mahish
बहना मेरी प्यारी सी
छोटी राज दुलारी सी
चलती मेरी परछाई सी
नहीं उसके बिना मुझे कोई खुशियाँ भाई सी ।
छोटी - छोटी कदमों से घर का नाप लगाती
तोतली अपनी बोली से सबका मन लुभाती
गिरती उठती आगे बड़ती जाती
हँसी से फिर सबका दिल वो बहलाती ।
रोती हुई उसे देख मेरी आँखे भर आती
खुद न सोती और मुझे भी है जगाती
दीदी - दीदी कह एक प्यारा सा ऐहसास दे जाती
खालीपन में मुस्कान से अपनी खुशियाँ ले आती ।
कोमल - कोमल हाथों से सबको उठाती
निंद नही टूटने पर बिस्तार में बैठ जाती
रो - रो कर फिर हल्ला मचाती
पर सबको उसका रोना हँसी दिलाती ।
ये वो ऐहसास है जो कोई और नहीं दे पाती
भले ही मैं दिन - रात उसके नखरें उठाती
वही है वो जो मुझे बड़ी बनाती
प्यारी बहना मेरी जो नयी आशा ले आती ।
By Rashmi Mahish

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