प्यार करना गुनाह थोड़े ही है
Updated: Dec 3, 2022
By Sejal Parsana
प्यार करना गुनाह थोड़े ही है,
उसमे डूबकर बिखरना थोड़े ही है।
हमे भी बहुत दूर तक जाना है,
हमारी मंजिल किनारा थोड़े ही है।
उस “चांद” की कसम, हम चांद लायेंगे ज़मीन पर,
उस अकेले आसमा का हक थोड़े ही है।
ईश्क भी करेंगे और गुरुर भी करेंगे,
यहां आ ही गए हैं, तो कुछ करके ही जायेंगे।
जवानी की अकड़ तो हमे भी आई है,
अकेले वक्त का हक थोड़े ही है।
माना हम अकेले मेहफूज हैं बहुत,
लेकिन आंखे भी न लड़ाए, ये जरूरी थोड़े ही है।
हमे परवाह नही रही अब दुनिया की,
पर मां के पैर भी ना छुए, ऐसे निक्कम्मे थोड़े ही है।
घायल बेशक हुए तेरी मोहब्बत में,
घायल बेशक हुए तेरी मोहब्बत में,
अब पूरी जिंदगी निसार करदे, ये कायदा थोड़े ही है।
चल आजसे तू अपने रास्ते, में अपने रास्ते,
मिले दोबारा तो मुड़कर देखू, इतनी शराफत थोड़े ही है।
By Sejal Parsana

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