पीड़ित ..
By Dr. Suboohi Jafar
हर मनुष्य को लगता है कि वह पीड़ित है,
परन्तु सच तो यह है कि वह अपनी ही भावनाओं से भ्रमित है,
अहंकार और आत्म सम्मान के मध्य बहुत ही महीन लकीर है,
जिसे समझने में अधिकांश लोग अक्षम हैं|
जो भी समस्याएँ हैं, कठिनाइयाँ हैं,
अधिकांशतः उसका कारण संवादहीनता है,
कोई सुलझाना नहीं चाहता, ध्यान केंद्रित नहीं करता,
और इस समस्या रुपी भँवर में फँसता जाता है|
देखते- देखते यह समस्या विकराल रूप धर लेती है,
बात ज़रा सी थी जो, अब रौद्र रूप धारण कर लेती है,
अब भी देर नहीं हुई है, आँखें खोल, दिमाग़ लगा
परिस्तिथियाँ चाहे कितनी विषम हों, ख़ुद पर विश्वास ज़रूरी है|
किसके पास कितनी साँसें हैं, यह कोई नहीं जानता,
कब भगवान के घर से बुलावा आ जाए, नहीं कोई इसका ज्ञाता,
लेकिन अहंकार तेरा इतना बड़ा है, तू झुकना नहीं चाहता,
इसी उहापोह में दुनिया से चल पड़ा तेरा कारवाँ|
रह गई तो बस, बात दिल की दिल के ही अंदर,
अब तेरा प्रतिद्वंदी भी पछताए , मन के भीतर,
सोच रहा, काश मैंने ही बात कर ली होती,
तो आज इस तरह आत्म ग्लानि की अग्नि न होती|
कभी- कभी ये आत्म ग्लानि अवसाद का रूप ले लेती है,
जो धीरे- धीरे दिमाग़ पर अपना अधिकार जमा लेती है,
अब भी समय है, कृमिकोष से बाहर निकल,
लड़ाईलड़इसपीड़ासे, रहनजाएकोईकसर|
By Dr. Suboohi Jafar

Comments