पिता का कर्ज
Updated: Sep 16, 2025
By Yakshita Gawan
पिता का कर्ज
कहा जाता है की मां ने हमे पैदा करने में
खूब अपना तन जलाया
पर उस पिता का क्या जो हर वक्त
बनकर रहा हमारा साया
मां तो फिर भी दुख में
अपने आंसू है बहा लेती
पर वो तो पिता की आंखे है जो
बिना आंसुओ के बस तड़पती रहती
अपने कंधे पर बिठाकर कराई
हमे पूरी दुनिया की सैर
जो चाहते है सिर्फ हमारी खैर
पर क्यों हम रहने लगे है उनसे ही गैर
ये समय न जाने कैसी करवट है ले आया
जो पिता बनकर रहते थे हमारा साया
आज उनको ही कर दिया हमने इतना पराया
जरा सोचो....
वो पिता के ही हाथ है
जो हर वक्त हमारे साथ है
वरना इस दुनिया में आया
हर कोई खाली हाथ है
यदि मां हमारा दिल है तो
पिता हमारी धड़कन है
हमारा बस यही एक फर्ज हैं
चुकाना हमे अपने पिता का कर्ज हैं
By Yakshita Gawan

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