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पिता (Father)

Updated: Sep 16, 2025

By Rohit 'Lukad' Jain


जो पुरे परिवार की ज़िम्मेदारी बिन कहे ढ़ो लेता हैं,

अपने सारे सपने परिवार के लिए खो लेता हैं ।


चेहरे पे बिन जताये सबकी हँसी हस्ता हैं,

सबके आंसू रोता हैं, सबके दर्द सेहत हैं ।


बच्चों की एक मुस्कान में अपनी दिन भर की थकान मिटाता हैं,

अपना हर दर्द हर तकलीफ़ भूल बच्चों की हर बात सुनता हैं ।


अपने बच्चों की हर ख़ुशी के अधिवक्ता हैं,

ज़मीन पे भगवान का दिया एक फरिश्ता हैं ।



By Rohit 'Lukad' Jain




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