पहली मुलाकात
By Aahish Anilrao Deshmukh
कतराती शरमाती, झिझकती हुई बात
याद है मुझे हमारी पहली मुलाकात
कभी तिरछी नजर से हम देखते रहे
कभी तिरछी नज़र से तुम देखते रहे
बातो बातो में छूं लिया, तुमने मेरा हाथ
याद है मुझे हमारी पहली मुलाकात
हम तुम मिले जैसे काफिया गजल का
इश्क ने कर लिया अब इरादा कतल का
सुलझे थे हम तुम, उलझाकर जज्बात
याद है मुझे हमारी पहली मुलाकात
घर जाकर मैं तेरी तस्वीर निहारता रहा
हर पल समेटकर यादों को संवारता रहा
वो तकीये से लिपटी, करवटें बदलती रात
याद है मुझे हमारी पहली मुलाकात
कदमों ने ताल धरी तेरे संग चलते चलते
तू भी रंगीन हो गई मुझमें रंग भरते भरते
दौर खुशी का दे गया, पलभर का साथ
याद है मुझे हमारी पहली मुलाकात
By Aahish Anilrao Deshmukh

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