पहचान (Identity)
By Bhavesh Agarwal
अगर ख़्याल किया जाए,
माना जाए, सीखा जाए
तो हमारी सोच क्या है?
क्या हैं हम जब मुक्त हैं?
क्यों हम अलग हैं परिस्थिति में?
हर कदम हमें एक सोच ने घेरा है
हम सब जानते हैं ख्याति का सेहरा है
दिन में अलग, शाम में गुम हैं
हम चलते रुकते सोच में गुम हैं
हैं कौन हम सबमें अलग, सबसे जुदा
अपनी तलाश है, हम जिंदा लाश हैं?
खुद पर विश्वास है, हममें कुछ तो खास है
अपनी पहचान के लिए जंग ज़ारी है
हिम्मत है बाकी, अभी उम्मीद नहीं हारी है
पर अगर ख़्याल किया जाए तब!!!
By Bhavesh Agarwal

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