पलछिन
By Samira Gupta
पलछिन पलछिन, सब दिन गुज़र जाते हैं
हों कठिन या फिर खुशनुमा, सब दिन गुज़रते जाते हैं...
कभी 'ये दिन भी गुज़र जाऐंगे'
तो कभी 'जाने कहाँ गए वो दिन' ....
मुश्किल घड़ियों के वो अनंत दिन
मौजों की रवानी के वो पखेरु दिन...
जेठ की दोपहरी में पहाड़ सा लम्बा दिन
पौष की ठिठुरन में तिल सा छोटा दिन...
जो बीत गया वो याद आया
जो आया नहीं उसका इंतजार किया..
न ही कर गुमाँ, न हो तू परेशाँ
न ठहरा है, न ठहरेगा
हर वक्त गुज़र जाता है
हर वक्त गुज़र जायेगा...
By Samira Gupta

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