”परीक्षा”
Updated: Sep 3, 2025
By Harshit Mishra
सफलताओं की पगडंडी को, खुद से जोड़ रहा हूँ मैं
जब से मैंने चलना सीखा, तबसे दौड़ रहा हूँ मैं।
हर दिन, हर घडी ,हर पल, एक नयी परीक्षा देता हूँ
अपने सगे सम्बन्धियों को रोज, एक नयी अपेक्षा देता हूँ।
जीवन की इन विषमताओं में, कुछ खड़े मेरे संग साथ में है
कुछ पीछे उपहासक है, कुछ लड़े मेरे संग साथ में है।
परीक्षाओ की इस भाटी में, नित दिन मुझ को जलना है
तुम कितना भी प्रयास करो पर, कुंदन बन मुझे निकलना है।
और सुनो
उड़ना तो है तय मेरा ,तुम कब तक मुझ को रोकोगे
पंख फैलेंगे मेरे भी, तुम कब तक मुझे को टोकोगे।
रहो में जितने काटे बिछा लो पर, मुझे को चलते जाना है
इन हर की प्यासी आँखों में, जीत का परचम लहराना है ।
By Harshit Mishra

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