परदेस
By Amita Grover
कभी सोचा न था
ऐसी अलग सी दुनियां में बसेरा होगा अपना
हमारी इस दुनिया का दूसरा छोर
जहा हमारे जहां से और आगे
सितारों के आगे एक और जहां है
यहां भी सूरज ढलता है
और पिघलता है समन्दर की
लहरो के बीचों बीच
यहां भी बारिश होती है
और चेहरा भिगाती है
लेकिन अलग ही कुछ माहोल यहां का
कुछ अलग सी सरगोशी है हवा में
कैसे समझाऊं तुमको
सिर्फ महसूस कर सकती हुं
पर जान लो ये हवा है परदेस की
और बारिश भी यहां टिप टिप सी है
मेरे देश की बारिश जोरों से बरसती है
यहां मिट्टी की खुशबू भी अनजानी है
बहुत हसीन है यहां के नजारे
सुरंगे पहाड़ और झरने सुहाने है
पर अपने वहां की छटा ही निराली है
बहुत अलग, बहुत खूब
पर अपना दिल तो उसी को ढूंढता है
रह रह कर
तुम रहते तो खुद जान जाते
तुम से अलग नही हे मेरा मन
और कहते ….
चल लौट चले अपने देश
जहा सब अपने है
अपनी बात समझते है
By Amita Grover

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