पत्ते
By Jyoti Singh
यह जो पत्ते हैं,
सब एक ही डाल के हैं
कुछ अब भी हरे हैं,
तो कुछ सूखने को आतुर
अपना सारा जीवन समेटे हुए,
अपने अंत तक पहुंचने को आतुर
इन्हीं में कुछ,
नन्हीं पत्तियां भी हैं
जो अभी आंखें ही खोल रही हैं
जीवन जीने का सटीक तरीका
इन अनुभवी पत्तों से पूछ रही हैं
किंतु,
यह विशालकाय वृक्ष,
कभी किसी की अवहेलना नहीं करता
कभी किसी का तिरस्कार नहीं करता
उसने तो,
अपने हर पत्ते को अपनाया है
उनके आरंभ से अंत तक
बिना किसी अपेक्षा के,
बिना किसी निराशा के
अपनी हर डाली,
हर पत्ते से उसे प्रेम है
यह जो पत्ते हैं,
एक डाल के हो ना हों,
एक ही घर के हैं,
एक ही वृक्ष के हैं ।।
By Jyoti Singh

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