नोंक झोंक वाला प्यार
By Aakash Deep
मुझे उनसे ख़फ़ा रहना
पसंद है,
और रूठ कर
मान जाने की किश्त ,
और भी सस्ती है ,
बस दो कप चाय बनाकर
उसका मेरे पास बैठ कर
सब कुछ भूल जाना,
और मुस्कुराते हुए
आंखों से ही
एक अज्ञात-सा
प्रश्न पूछ लेना,
पहला प्रश्न भी यहीं हो,
और आख़िरी प्रश्न भी बस यही,
कि सुनो.........
चाय कैसी बनी है ?
बाकि शेष रहे सिर्फ
धीरे-धीरे शुरु हुआ
प्रतीकों में बातों का कारवां ,
जिसमें अतीत की स्मृतियाँ,
चाय की भाप सी,
वर्तमान की यथार्थता
चाय की उष्णता-सी,
बाकि भविष्य की कल्पनाएं
चाय की चुस्कियों-सी,
खाली हुआ चषक चाय का
मानो जैसे
रिक्त हुआ हो कोई प्रेमी
अपनी प्रेमिका के लिए
झूठी नाराजगी से ।।
By Aakash Deep

Comments