निस्वार्थ औरत
By Preeti Bansal
औरत केवल समाज का हिस्सा नहीं पूरा समाज है।
सबको रिश्तों में बांधती वो एक हीरा नायाब है।
मां, बहन, बीवी बनकर संभालती सबको एक मजबूत कड़ी है।
सबपर निस्वार्थ प्रेम और मान लुटाती भगवान की भेजी एक संपूर्ण परी है।
उसके मान सम्मान के आगे किसी का मोल नहीं है,
क्योंकि वही समाज कल्याण की नीव और इमारत है,
और रक्षक से कवच बनने का मूल आधार भी।
By Preeti Bansal

Comments