निकल आए हैं ..
Updated: Jun 10, 2023
By Sonika Yadav
चाहतों के जैसे पर निकल आए है ,
पत्थरों पर भी शजर निकल आए हैं ..
कितनी जल्दी है सबको ऊँचा उड़ने की ,
परिंदे भी गाँव से शहर निकल आए है ..
न रिश्ते,न नाते ,हैं कितने बेमाने सब
खून के रिश्तों में ज़हर निकल आए हैं ..
सींचा अरक़ से जिस घर को वालिद ने ,
उस घर से होकर बेघर निकल आए है ..
है ठोकर राहों में ,के ठोकर पाओं में ,
जिधर से देखो उधर निकल आए है .
By Sonika Yadav

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