नारीवाद
Updated: Jun 10, 2023
By Shweta
इस शब्द का बस इतना सा है अर्थात
कि न तुमसे ज्यादा और न तुमसे कम,
बस बराबरी का है ये विवाद।
हाँ माना लोग Modern हो गए हैं,
पर बस कहने को
क्योंकि मेरे भाई को सिखाई गयी परिभाषाएँ,
मिलती नहीं आज भी उस सीख से
जो दी गई है मेरी बहनो को।
अब शहर की चकाचौंद में
गाँव की कमियाँ कहाँ नज़र आती हैं,
जब एक 12 साल की लड़की
एक 52 साल के बूढ़े से ब्याह दी जाती है।
और बेटी तो पराया धन है सुनते - सुनते बचपन बिता दिया इस आस में
की एक दिन अपने घर जाऊँगी
पर फूटी मेरी किस्मत
की वहाँ "दूसरे घर से आयी है" कहकर
घर में मेरी अलग जगह बना दी जाती है।
अब देखो ना, वो चाहे Doctor बने, Engineer बने या बन जाये Film Actor
फिर मुझपे क्यों इतनी बंदिशें लगाई हैं,
और वो चाहे तो रात को भी बाहर घूम सकता है,
पर मुझे दिन में भी मनाही है,
सच कहूँ तो थक गई हूँ दुनिआ में अपनी काबिलियत साबित करते-करते
अब नाजने कब इस समाज से मेरी रिहाई है
और अब ऐसे में अगर लड़कियां लड़ रही हैं अपने हक के लिए
तो इसमें क्या बुराई है।
By Shweta

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