नारी तेरी पहचान
Updated: Sep 16, 2025
By Kanak Singh
नारी तेरी पहचान क्या है?
किसी की बेटी किसी की बहु
किसी की बहू या किसी की पत्नी
या फिर किसी की मां
पर तेरा असली नाम क्या है?
जिसने जैसा चाहा सबको तूने
सर आंखों पर बिठाया
फर्ज के नाम पर हर घड़ी
हर पल टूट के बिखड़ती रही
पर सबको तूने संभल कर चलना सिखाया
हर रिश्ते को दिए तूने पूरी मान
पर तेरे सम्मान का क्या है....
बाबूल के आंगन जन्म लेते ही
उनकी इज्जत का भार भी उठा लिया
तूने अपनी उन नाज़ुक कंधों पर
भाई की कलाई पर राखी बांध कर
मर्यादा उनकी भी आ गई तेरे ही कंधों पर
सात जन्मों के वचन देकर दे कर
बन कर आई जिसकी अर्धांगिनी बनकर
उन्हें भी कहां याद रहा कि
है कोई अरमां तेरे भी अंदर
जन्म दिए तूने जिन्हें अपने खून से सींच कर
वो भी तेरे कहां है बता जरा सोच कर
कहलाएंगे हमेशा पिता की संतान
फिर बोल ज़रा तेरा अभिमान क्या है....
तू सर उठाएगी पर
सम्मान के नाम पर कुचल दी जाएगी
तू पंख फरफराएगी पर
पिंजरबद्ध हो के रह जाएगी
तू गर आंसू भी बहाएगी
तो भी कसूरवार बस तूही कहलाएगी
जो न मांगी गई हो नारी से अब तक
इस समाज में बचा ही वो बलिदान ही क्या है
जब तू खुद जन्म देने वाली मां की न कहला सकी
फिर बोल तेरी असली पहचान क्या है......
नारी मत कर अभिमान तू
जब तूझे पता ही नहीं तेरी पहचान क्या है.....
By Kanak Singh

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