नारी तू नारायणी
Updated: Sep 16, 2025
By Anita Singh
तुम जीवन रूपी मंदिर का पताका हो, हमने तुम्हें सदा अपने माथे पर शिरोधार्य किया है। और खुद को सदा उसी मंदिर की नींव में रखा। सबने सिर उठाकर शान से पताके की सराहना की परंतु किसी ने झुककर नींव के पत्थर पर नज़र नहीं डाली। हमें तुमसे बराबरी नहीं चाहिए सिर्फ तुम्हारी आखों में अपने लिए सम्मान की उम्मीद रखते हैं। बराबरी क्यों करना तुमसे !! जब प्रकृति ने खुद ही हमें तुमसे बेहतर बनाया है तुम पूछोगे बेहतर कैसे ? हो सकता है तुम हमारा मजाक भी उड़ाओ,परंतु शांत मन से सोचकर देखना। अगर हम मजबूत संवेदन शील और बेहतर ना होते तो प्रकृति या ईश्वर ने तुम्हारी रचना से लेकर तुम्हारी हर जिम्मेदारी में तुमसे ज्यादा हमारा हिस्सा क्यों होता? बात हक हिस्सेदारी या जिम्मेदारी का नहीं है, सिर्फ हम चाहते हैं वही इज्ज़त वही मकाम आपकी आंखों में हमारे लिए हो जो हमारी आंखों में आपके लिए है। क्योंकि प्यार और सम्मान ही बराबरी का दर्ज़ा दे सकता है।
By Anita Singh

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