ना रहकर भी ,सदा रहूँगा मैं ।
Updated: Jan 12, 2023
By Pankaj Wadhwa
यह कविता मैंने अपने पिताजी की याद में लिखी है वह अब इस दुनिया में नहीं है परंतु मेरा यह मानना है कि माता-पिता इस दुनिया में अपने बच्चों के माध्यम से सदा जीवित रहते हैं l
मेरी यह कविता उन ही सब माता-पिता को समर्पित है जो कि अपने बच्चों के रूप में इस संसार में सदा विद्यमान रहते हैं I
ना रहकर भी ,सदा रहूँगा मैं ।
मैं रहूँगा सदा,तुम्हारे रूप में,
तुम्हारे रक्त की हर बूंद में,
तुम्हारी हर एक कोशिका में।
ना रहकर भी, सदा रहूँगा मैं ।
मैं रहूँगा सदा, तुम्हारे भाव में, विचारों में, आदतों में
तुम्हारे जीवन के मूल्यों में,
तुम्हारे संकल्पों में,तुम्हारे अनुशासन में, करुणा में,
जीवन के प्रति तुम्हारे प्रत्येक दृष्टिकोण में ।
ना रहकर भी, सदा रहूँगा मैं ।
तुममें मैं सदा प्रतिबिम्बित रहूंगा, तुम से ही सदा रौशन रहूंगा,
अगर रौशन ना हो सका तो शर्मिंदा हो जाउंगा ।
मेरी अच्छाइयों को तुम अपना लेना,
बुराइयों को जला देना,
बस यही इच्छा है मेरी।
क्यूंकि,
ना रहकर भी, तुम में सदा रहूँगा मैं ।
By Pankaj Wadhwa

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