नजारा
By Praveen Kumar Das
तुमने रिश्ते बदलते देखा होगा
मैंने रिश्ते निभाने वाले बदलते देखा हैं l
जो जीवन भर साथ रहने के वादे किया करते थे
उन्हें अगले ही पल एक दूसरे से टुटते देखा है l
जो कभी कांधे पर सिर रख कर गम भुलाया करते थे
उन्हें अकेले अंधेरे किसी कोने पर रोते बिलखते देखा है l
अकेलेपन का अनुभव ही है ऐसा
आंसू छुपाने को सिर झुकाते देखा है l
सीना तान सिर उठा कर चलने वालों
उन चट्टानों को, रास्तों पर ठोकर खाते देखा है l
देखा हमने है बहुत कुछ
देखा बदलता ज़माना है,
यह भी कह दो तुमने क्या देखा
आखिरतुम्हाराक्यामाननाहै ।
By Praveen Kumar Das

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