“नज़रिया”
By Mandeep Kaur
किसी का मामा बन जाए,
किसी को उसे देखते ही महबूब की याद आ जाए,
कहते हैं चाँद में दाग है,
पर उसके बिना रात भी काली और वीरान हो जाए।
यह तो सब के अपने-अपने नज़रिए की बात है,
कोई उसमें दाग है ढूंढता,
और कोई उसकी खूबसूरती के गुण गाए।
By Mandeep Kaur

Good
Good lines
Beautiful written
True to earth
Nice