धुआँ धुआँ शाम है
Updated: Dec 5, 2022
By Karan Handa
धुआँ धुआँ शाम है
धुआँ धुआँ है ज़िंदगी,
ज़िंदगी जीने हम निकले
ख़ता हुई नादान सी,
धुआँ धुआँ शाम है
धुआँ धुआँ है ज़िंदगी !
हर लम्हा नई बगावत की
बादलों में डूबने की चाहत की,
तो कभी फूल बिछाए बिस्तर पर
जो भरे थे इश्क़ कमीने से,
भीगा कभी जिस्म मेरा
तेरे जिस्म से बहते पसीने से,
जो बात कही है मैंने
वो बात कही हे इश्क़ की
धुआँ धुआँ शाम है
धुआँ धुआँ है ज़िंदगी !
आसमानों से आंधियां उलझ गई
और बदल बरसे ज़मीन पर,
तेरी एक नज़र के क़हर से
रूह मेरी राख़ हुई,
धुआँ धुआँ शाम है
धुआँ धुआँ है ज़िंदगी !
By Karan Handa

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