धुंध तेरी यादों की
By Seema Kaushik "Mukt"
धुंध तेरी यादों की, ज्यूँ बर्फ में लिपटा गिरी
बूँद-बूँद पिघल रही, नैनों से अश्रु-बादल सी
क्यों पिघल नदी-सी ये, ह्रदय में प्रवाहित हो रही
हर नस में, खून की बूँद में, सुलगती अंगार-सी ।
धुंध तेरी यादों की ज्यूँ बर्फ में लिपटा गिरी…
भावनाओं के ज्वार में ,डूबती उतराती मैं
अनचाहे यादों के भंवर में ,गहरे फंसती जाती मैं
साफ़ दिख रहा ना, वर्तमान ना भविष्य ही
ऐसे जैसे जीवन में मेरे, आ गयी हो बाढ़-सी
धुंध तेरी यादों की ,ज्यूँ बर्फ में लिपटा गिरी…
वक़्त के बढ़ते कदम, जब नहीं पड़ते पीछे कभी
बावरी बन क्यों मैं इन, बीते लम्हों को पुकारती
छोड़ दूँ या मिटा दूँ मैं, क्या धुंध तेरी यादों की
जो बिगाड़े आज मेरा, मित्रता करे शत्रु सी
धुंध तेरी यादों की, ज्यूँ बर्फ में लिपटा गिरी....
By Seema Kaushik "Mukt

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