धीरज रखना
By Shweta Khati
धीरज रखना उन क्षणों में भी, जब लगे
कोई बात नहीं बनती, कुछ रात नहीं कटती ।
कोई साथ नहीं देता, कोई आवाज़ नहीं उठती,
बस जज्बात हावी हो उठते हैं, जो एक धुन में रहते हैं ।
उन क्षणों में, थोड़ा और अधिक खुद से प्रेम जताना,
थोड़ा और अधिक जो बन सके कर जाना ।
कुछ चिराग जलाना, कुछ कमरे को महकाना,
कुछ खिड़कियाँ खोलना, कुछ आँगन सजाना ।
कुछ तस्वीरों को पुरानी पलटना, कुछ नई तस्वीरों में खो जाना,
खूब करना बातें, खूब जी बहलाना ।
हँस पाओ तो हँसना, हँसा सको तो हँसाना,
रो पाओ तो रोना, गा पाओ तो गाना ।
लौट आना सहजता से फिर,
और जरूरत पड़े तो फिर- फिर दोहराना ।
By Shweta Khati

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