top of page

धर्म न पूछो

Mar 24, 2023
2 min read

By Amit Sagar


मुझसे मेरा धर्म न पूछो जो मिला मुझे समाज से,

मैं तो हूँ बस हिंदुस्तानी, मुझे पुकारो उसी नाम से।


मजहब के इस जाल में फंस कर, नहीं मुझको यूँ ही मरना,

मैं तो हूँ आज़ाद परिंदा, बस जानू अपनी धुन में उड़ना।


धर्म मजहब का नाम लेकर, बंद करो लड़ना-मरना,

हर धर्म हमें सिखलाता, सबसे पहले इंसा बनना।


इन धर्म के ठेकेदारों ने बस तुमको बहकाया है,

छीन के तुमसे अस्तित्व तुम्हारा बस अपना राज़ चलाया है।


मेरे देश की मिट्टी ने तो सबको ही अपनाया है,

हिन्दू मुस्लिम की आग लगाकर नर्क तुमने इसे बनाया है।


हर मजहब का फौजी सरहद पर देता जान है,

कोई पूछे धर्म उसका तो बस कहता हिंदुस्तान है।


आज़ादी की कीमत तुमने कहाँ अभी जानी है,

पूछो जाकर उस बूढी माँ से जिसके बेटे ने दी क़ुर्बानी है।



जिसके बूढ़े कन्धों ने दिया अपने लाल को कन्धा,

आँसू एक न बहाया उसने पर देख तुम्हे है शर्मिंदा।


पूछो जाकर उस औरत से जिसने खोया अपना सुहाग है,

रो-रो कर आँखें पथराई, रहती सदा उदास है।


पूछो जाकर उस बच्चे से जो अभी तक अनजान है,

पापा-पापा कहता रहता, पापा उसकी जान है।


पूछो जाकर उस बहन से, जो घर में सबसे छोटी है,

कहती नहीं किसी को कुछ भी, बस एक कोने में जाकर रोती है।


सरहद पर जब तुम्हारे, कान से पास से गोली निकलेगी,

रह जायेगी आधी साँस अंदर, आधी बाहर निकलेगी।


असली क्रांतिकारियों ने तो दी अपनी क़ुर्बानी है,

आज़ादी जो मिली है तुमको, ये उनकी ही मेहरबानी है।


भगत सिंह, अशफ़ाक़, सुखदेव अपने को हिंदुस्तानी बतलाते,

तुम्हारी तरह चिल्ला-चिल्ला कर न हिन्दू-मुस्लिम कहलवाते।


शूरवीरों की धरती है ये, भारत इसका नाम है,

तिरछी इसकी पेशानी है, तिरंगा इसकी शान है।


केसरिया रंग बलिदान का, शांति का रंग भी है इसमें,

हरियाली बिखेरे चारों ओर, सर्वधर्म का चक्र भी है इसमें।


ग़र आज़ादी ही पानी है, तो अपनी सोच से पाओ तुम,

छोड़ो ये सब धर्म के चक्कर, बस हिंदुस्तानी बन जाओ तुम।


By Amit Sagar



Recent Posts

See All
Mirrored Truth

By Rufaida Manzoor I stood beside the silent lake, With eyes that felt no urge to break. My hair fell low in shadows deep, The waters...

 
 
 
My Antidote

By Anveeksha Reddy You fill my books with your ink, seeping into the pages bright and brilliant The words etched into the cracks of it,...

 
 
 
Avarice

By Anveeksha Reddy You tear my skin and pick on my bones I label it as gluttony for you Churning and shattering the remains of my...

 
 
 

Comments

Rated 0 out of 5 stars.
No ratings yet

Add a rating
bottom of page