दोस्ती
By Krishna Mahana
ये रिश्ता कुछ ऐसा है हमारा,
एक जरिया तो दूसरा है सहारा ।।
ये दोस्ती में इज्ज़त की नहीं कोई इज्ज़त,
शरीफ़ वाली नहीं शामिल इसमें कोई हरकत ।।
स्वागत यहां होता है गालियाँ से,
तारीफ़ जिसमें की जाती है तानो से ।।
दोस्ती को छोड़ और भी रिश्ते हज़ार है,
पर दोस्ती के बगैर ज़िन्दगी की स्वाद ही बेकार है ।।
कमाल ये रिश्ता बनाया है वो खुदा ने यार,
तू रूठ जा सही पर मैं मनाऊँ तुझे हर बार ।।
दोस्ती सलामत रहे हमेशा हमारी,
जेसे सलामत है कृष्ण सुदामा की यारी ।।
By Krishna Mahana

Comments