देशद्रोही
By Uday Kumar
देशद्रोही वही जो,वेI रहम बन जाता है,
मातृभूमि का सौदा करने में,न कभी शर्माता है,
नैतिकता आगाज कहाँ,नफरत का समाँ जलाता है,
देशद्रोही, वही जो, वे रहम बन जाता है!
सबकी धरती,सब है मालिक,
अधिकार सिर्फ फरमाता हैं,
मातृभूमि का नमन फर्ज ,
पर वो वंदे मातरम नहीं कह पाता है !
द्रोही सिर्फ अधिकार जताता,
कर्तव्य नहीं निभाता है !
मौका मिलने पर वह दुष्ट,
आतंक मचा इतराता है !
मातृभूमि का वंदना करना
कर्तव्य सभी का,फिर विवाद क्यों पैदा होता ?
राष्ट्रधर्म से बड़ा न और कुछ,
फिर धर्म-मजहब क्यों आड़े आता ?
By Uday Kumar

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