देश में संग्राम
Updated: Dec 7, 2022
By Priyanka Sharma
कितना मुश्किल हैं नफऱतों से खुद को बचाना
ज़िद्द और जुनून भरे ज़हन को समझाना !
शब्दों की मर्यादा न तुमने की न उसने
और आग मे जल गया सारा ज़माना !!
ख़ौफ़ जान का नहीं, जहान का हैं
आने वाले तूफ़ान का हैं !
अब न भरोसा वही, न रही मोहब्बत
तुम बताओ मैं किस से करू शिकायत !!
हालातो से समझौता नहीं मंज़ूर मुझे
किसी सियासत का हिस्सा नहीं बनना मुझे !
इन्साफ का इंतज़ार तो हैं
पर किसी शतरंज का मोहरा नहीं बनना मुझे !!
दिल दहल गया, आँखे नम हैं
खामोश तुम भी नहीं, न हम हैं !
कभी न खत्म होने वाली रात हो गयी
कल तक कुछ ओर थी और अब नयी बात हो गयी !!
ज़बानी जंग, अधूरा ज्ञान
प्रचंड भावना, अखंड अभिमान !
और कितना दुर्भाग्य हैं अपना
हम कहते इसको स्वाभिमान !!
धर्म पर चली बहस हैं
फिर बेबस हुई बैठक हैं !
मत न मिला मीत भी गयी
जला कर बस्ती रीत भी गयी !!
By Priyanka Sharma

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