देखो तेरी याद में
By Abhishek Bagri
दफ़्न किए है मैंने कब्र में,
किसी ख़ाब को अभी मारा नहीं है
यों जो चल रहीं है जिंदगी
इसपर रत्ती भर का हक़ हमारा नहीं है
ये जो करते है बातें मुझे आजाद करने की,
मेरा जरा सा उड़ना इन्हें ग्वारा नहीं है
सुबह सुबह ही लड़के आया था उसके खातिर
शाम होते होते जो हमारा नहीं है
ये तो जहां में है मशहूर खुदा से भी ज्यादा,
“अभी “ तुझे कैसे पैसा प्यारा नहीं है
दफ़्न किए है मैंने कब्र में,
किसी ख़ाब को अभी मारा नहीं है
By Abhishek Bagri

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