दूरी / Distance
By Vidit Panchal
दो कदमों पर मिल जाएगा
मेरा कोई शौक पुराना
दो कदमों पर देखो फिर
गिरा मिलेगा गीत कोई ।
वहाँ से आगे दो कदमों पर
आधी-सी कविताएँ होंगीं
उनसे आगे मिल जानी है
आधी खुली किताब कोई।
वहाँ से चलकर दो कदमों पर
कलम के टुकड़े मिल जाएंगे
उनसे दो कदमों पर होगा
मेरा गढ़ा किरदार कोई।
मेरी इन सबसे दूरी शायद कुछ कदमों से ज़्यादा है इन सबके पास रखा मेरा एक अनमना वादा है, इन कुल वादों से दूरी भी हर दिन थोड़ी बढ़ जाती है मेरे पास ख़्वाहिशें हैं ढेरों और घायल एक इरादा है। By Vidit Panchal

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