दूरियां
By Vanshika Singh
तेरे दूर जाने से दुख है रोक भी नहीं सकते क्योंकि दिल यह मजबूर है
जी नहीं लगता तेरे बिना की
कुछ कमी सी है
तेरे दूर जाने से
जिंदगी अधूरी सी है
कैसी मजबूरी है
कह भी ना पाए
रेह भी ना पाए
आंखें नम हो तब भी मुस्कुराए,
हम तो अब बस तुझको ही चाहे
जाते-जाते मेरी ख्वाहिश पूरी करते जाना,
एक बार सीने से लगाकर मुकम्मल करते जाना,
देना ना सके साथ तो कोई बात नहीं
बस यह सोचकर चुप हूं,
समय है कट जाएगा,
तू कभी तो वापस आएगा।
By Vanshika Singh

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