दुनियादारी
By कुणाल मंडल 'अनिकेत'
किसी को दौलत प्यारी,
किसी को शोहरत प्यारी,
बड़े मासूम है हम,
हमें प्यारी है खुद्दारी।
ज़माने से मिला क्या हो, किसी को दोष क्या दे,
हमारी शराफत ही है हमारी गुनहगारी।
यूँ तो ज़माने की हजारों ही खता रही,
चले है हम सिखाने अब इसे ईमानदारी।
यह माना की होगी बड़ी परेशानी,
मगर हमनें कभी हार नहीं मानी।
By कुणाल मंडल 'अनिकेत'

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