दीपावली
By Vidhi Kumbhat
रोशनी का त्योहार कहो या सत्य की जीत,
राम सिया का आगमन कहो या परिवार की रीत।
दीपावली के दीए की चमक की कहानियों पर नजर डालो,
उस ज्वाला में छिपी कथाओं से पर्दा हटा लो।
सिया का हाथ थामे रामचंद्र जी उस ज्वाला से होते हुए अयोध्या पधारे,
प्रतापी श्री कृष्ण ने नरकासुर का वध कर सोलह हजार जीवन सॅंवारे।
महावीर ने मोक्ष के द्वार खोल दिखाए,
वहीं द्रौपदी संग पांडवों ने आशा की किरण बन हस्तिनापुर के कपट को धर्म के पाठ सिखाए।
यह तो हुई देवी-देवताओं की बात,
पर छिपी है इसमें संपूर्ण भारत के
हर परिवार की एक खुशहाल जगमगाती रात।
नए वस्त्र पहने बच्चों की वह मासूम किलकारियॉं,
बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद और यारों की हसीन यारियॉं।
मॉं के हाथों के पकवानों में खोए पल,
फूलों और रंगोलियों से सजी सारे स्थल।
मॉं लक्ष्मी की आरती सब मिल गाते,
दीयों का थाल हम घुमाते।
एक छोटा सा दिया कितना कुछ कह जाता है,
अनगिनत कहानियों की एक झलक दिखला जाता है।
एक दीपक की लौ में समाया यह विशाल त्यौहार है,
दीपावली नाम है इसका, यह खुशियों से पिरोया हुआ भारत का हार है ।
By Vidhi Kumbhat

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