दिसंबर याद आता है
By Nazia Bano
कोई लम्बी मुसाफत अपनी तय मंज़िल को पा जाये
कोई जब ख़ूबरू रिश्ता आखिरी हद को आ जाये
हसीं एक ख्वाब आँख खुलते ख़त्म हो जाये
सफर में हमसफ़र से वक़्त जब रुखसत का आ जाये
मुझे ऐसे में शिद्दत से दिसंबर याद आता है...
कोई जब शोख सा लहजा कभी जब सर्द हो जाये
कोई सरसब्ज़ वादी जब ठिठुर कर ज़र्द हो जाये
बदलना मौसमों का साल का दिन रात का तय है
कोई जज़्बात का दरिया कहीं जब बर्फ हो जाये
मुझे ऐसे में शिद्दत से दिसंबर याद आता है.....
राह का आखिरी पत्थर, सफर के ख़त्म होने का
दिसंबर एक निशां भी है नया आग़ाज़ होने का
सफर ये ज़िन्दगी का इस तरह से चलता जाता है
किसी से जब बिछड़ कर कोई नया साथी बनाता है
मुझे ऐसे में शिद्दत से दिसंबर याद आता है.....
By Nazia Bano

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