दिल्लगी
By Pallavi Jawalkar
दिल्लगी ही करना हो, तो हद में करो
हद पार हुई, तो बद्तमीजी मानी जाएगी
इरादा ना भी हो, दिल तोड़ने का ग़र
फिर भी वही तुम्हारी फितरत मानी जाएगी
ग़र करनी हो, मोहब्बत तो रूह से करो
जिस्म से हुई तो ज़रूरत मानी जाएगी
पसंद तो हज़ारों आते हैं दिल को पर
पलकों के गिरने पर भी जिसका अक्स् निगाहों में हो,
उसी से मोहब्बत मानी जाएगी
By Pallavi Jawalkar

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