दिल या दिमाग ?
By Ankita Pradeep
दिल के भरोसे पर दिमाग ने कैलकुलेशन कर डाली
और जिनपर आंखें मूंद कर भरोसा करना चाहते थे उसपर दिमाग ने ' छोड़ो हटाओ ' की टैग लगा डाली
दिल किसके ख्यालों में बिज़ी है
और दिमाग को उसे अंधेरे कमरे में बंद करने की ज़िद्द है
खुशियां भी अब पेंडुलम की तरह झूल रही हैं
कभी दिल के बाग में तो कभी दिमाग की उलझनों में तंग है ।
By Ankita Pradeep

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