दिल की सुनो
By Pallavi Jawalkar
जो दिल में नहीं, उसे कर रहे हो क्यूं
जो दिल में है, उसे दबा रहे हो क्यूं
कभी तो ज़माने की फ़िक्र छोड़कर, सुन लो इसकी
कभी तो हासिल करने की चाहत छोड़कर, सुन लो इसकी
शुरू में शायद रोना पड़ेगा बहुत
एक बार सुन कर देखो ज़नाब वरना
बाद में पछताना पड़ेगा बहुत
कई बार सुन कर भी अनसुना कर चुके हो, इसकी आवाज को तुम
दूसरों के सपनों तले दबा चुके हो, अपने उस एक सपने के आगाज को तुम
चाहत तो होगी, तुम्हारे भीतर भी उसे पूरा करने की
क्या पता, कायनात साजिश रच रही हो, तुम्हारी चाहत को पूरा करने की
एक बार कोशिश करके तो देखो
सपना मेरा पूरा करना है मुझे, यह ठान कर तो देखो
मुश्किल राहों पर, गिरकर तुम संभलना सीखो
सपना मेरा पूरा करना है मुझे, यह ठान कर तो देखो
By Pallavi Jawalkar

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