दिल की बेल गाड़ियां
By Akshita Goyal
खोकर मुस्तकिल में, या माजी में
ज्यादा गुस्से, नफ़रत या उदासी में
दिल ना दब जाता है इन सब के कहर में
और दो ही बेल गाड़ियां हैं इस दिल के शहर में
ढूंढो अगर , तो एक ना एक को तो मिल ही जाना है
नाम है हसीं और रुआँसी, काम दिल का बोझ उठाना है
तो हर चीज़ से जब मन उबने लगे
दिल इतना भर जाये, कि डूबने लगे
तो देर तक इस उलझन में ना ख़्वार होना
जल्द ही किसी एक गाड़ी पर सवार होना
या तो रो कर मन हल्का कर लेना
या धूप बुलाकर, उसके किस्से याद कर हस लेना
By Akshita Goyal

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