दिल की बातें
Updated: Dec 5, 2022
By Dixit Tarun Shah
दिल में भरा सैलाब था,
हमे बहुत कुछ बयां भी करना था।
जज़्बातो की लहर चली थी,
अब किनारे पर आना भी तय था।
हिम्मते जुटा कर,
आज बेपरवाह हो चला था।
दिल खोल कर आज,
सब कुछ कह गुज़र ने को मन कर रहा था।
अज़ियतें बयां कर ही रहा था,
चंद शब्दो से अपने हालत बयां कर भी चुका था।
इसी बीच दो पल रुक क्या गया मैं,
पहला अंतरा पुरा हो गया है,
यही सोच कर वो “वाह !! वाह !!” करे जा रहा था।
अब क्या ही कहे,
के ये कविता नहीं जज़्बातो का शोर था।
दिल में भरा सैलाब था और,
हमे बहुत कुछ बयां भी करना था।
By Dixit Tarun Shah

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