दिल कही खोना चाहता है
By Vidhi Sharma
ना जाने क्यों पर दिल कही उड़ना चाहता है
फिर से बच्चा बनना चाहता है
बेफिक्री में रहना चाहता है
चाहे जो भी हो हालत पर
हर समय खुश रहना चाहता है ,
ना जाने क्यों पर दिल कही उड़ना चाहता है
जिंदगी में कुछ बनना चाहता है
नाम कमाना चाहता है
जिसके कंधे पर बैठ के देखा मेला
उसके कंधो की जिम्मेदारियां उठाना चाहता है ,
ना जाने क्यों पर दिल कही उड़ना चाहता है
दुनिया की कही बातों को झूठी बताना चाहता है
किसी से कम नही हू ये बताना चाहता है
भले ही एक दो बार धोखे खाए
पर अब इन सब चीजों से आगे बढ़ना चाहता है
ना जाने क्यों पर दिल कही उड़ना चाहता है
सब कुछ करके
बहुत कुछ सेहके
खुद को कोसके
सब कुछ सोचके....
दिल उड़ना नही कही खोना चाहता है ,
ना जाने क्यों पर दिल अब कही खोना चाहता है
दिल अब खोना चाहते है
किसी के गले लग कर रोना चाहता है
थक गए अब जिंदगी से
बस अब कही चैन से सोना चाहता है ,
ना जाने क्यों पर दिल अब कही खोना चाहता है .....
By Vidhi Sharma

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