दिल करता है
By Abhimanyu Bakshi
नगमा कोई पाक सा गाने का दिल करता है,
हस्ती खोकर खुद को पाने का दिल करता है।
जहां हवा बदल रही है कैलेंडर की तारीख़,
वापिस उस घर भी जाने का दिल करता है।
बायें हाथ का खेल तो नहीं सुर-ताल हमारे लिए,
पर अक्सर साज़-वाज़ बजाने का दिल करता है।
नए दौर के नाम पर कई चीजें वाजिब हो गई,
कई बदलावों पर शिकायत जताने का दिल करता है।
इस लफ़्ज़ों के दायरे में है उलझने कई,
खामोशी से दिल की आवाज़ सुनाने का दिल करता है।
मुद्दतों में सही, आसमाँ का इख़्तिताम आ ही जाएगा,
हमें उफुक तक जाने का दिल करता है।
हाँ, यूँ तो ज़िंदगी अपने लिए ही जिया करते हैं,
पर अक्सर लोगों को कुछ कर दिखाने का दिल करता है।
हाँ ज़ाहिद यूँ उतार-चढ़ाव तो आते रहते हैं,
इनके दरमियान मगर थम जाने का दिल करता है।
By Abhimanyu Bakshi

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