top of page

दास्तां – ऐ – ज़िंदगी

Dec 6, 2022
2 min read

Updated: Dec 7, 2022

By Shruti Goyal




सपने कहूं या कहूं मैं पैगाम ,

आंखे खोलूँ या करदूं बेनाम

खुदकी जरूरतों से मैं करूं खुदको बेखबर ,

कोशिश करूं की ना आऊं किसीको नज़र।


चांद के टुकड़े की मांग ना करूं मैं तो अपना आसमान खुद बनाऊँ ,

आंधियों से लड़ने की बात हैं पुरानी

मैं तो खुद ही बवंडर बन जाऊं।


मेरी उम्मीदों की उड़ान अलग हो

यही मेरे हर ख्वाब का सोचना हैं,

पर तो कबूतर के भी होते हैं

लेकिन मुझे हंस जैसा उड़ना है ।





अभी कुछ शांत सी हूं

क्योंकि मुझे भी पता है हर वक्त गर्जना जरुरी नहीं होता ,

दहारने के समय मैं शेर जैसे दहारूं

नहीं तो भौंकने का प्रदर्शन तो कुत्ता भी है होता ।


बड़ा नहीं कामियाबी है मेरी ज़रूरत

दुनिया तो देखूं लेकिन वो जो मैंने बनाई है,

दूखी तो हूं लेकिन अपने दुख को दूसरों पर ढोना छोर दिया

यहीं मेरी सचाई हैं ।


पेड़ को तो उखाड़ फेंका

बिज कैसे हटाओगे ,

आग लगकर बढ़ चुकी है

अब इसे कैसे भुजाओगे ।


आकाश काला था अभी तक

लेकिन अब हम तारे बनकर जगमगाएंगे,

चांद की तो अपनी रोशनी ही नहीं थी

पर अब हम जुगुनुओं की तरह चमक कर प्रकाश लाना सिखायेंगे ।


अब यही है मेरी राह

मुझे इसी पर चलते जाना है ,

बंजारापन पसंद है मुझे

अब ना कोई मेरा ठिकाना हैं ।


आँसू छोर आई उन गलियों में

जहाँ मेरा अकसर जाना होता था ,

बारिश की बूंदों जैसी एक-एक कर बरस रही थी

मुझे तो अब सैलाब में परिवर्तित होना था।


चुप रहकर सब सहकर देख लिया

अब सोचा कुछ नया करते हैं ,

इतने दिन तो मौसम विभाग आसमान साफ दिखा रहा था

पर अब हम बिजलियों जैसे कड़क कर इसे बदलते है ।

जूररत की मैंने जो तुम्हारी वादों और कसमों को निभाना छोर दिया ,

तुमने तो मुझे पिंजरे में बंद करना चाहा

मैंने तो पिंजरा ही तोड़ दिया ।


आज कल हाथ कुछ ज्यादा अच्छे से धोती हूं

क्योंकि मुझे मेरी पुरानी किस्मत मिटानी हैं,

ये मेरी जिंदगी है

मुझे मेरी हाथ की नई रेखायें स्वं बनानी है ।


एक बार में ही बम जैसे फटकर सारा बारुद नहीं निकालना,

दिए की लो हूं मैं भले ही छोटी

लेकिन ज्यादा देर के लिए मुझे जलते जाना।


अब नहीं मुड़ना पीछे

यहीं मैरी ज़िंदगी है इसी पर आगे बढ़ती जाऊंगी ,

Google map इस्तमाल करके रास्ता ढुंढना छोर दिया

अब तो मैं खुद रास्ता दिखाने के लिए navigator बन जाऊंगी ।


By Shruti Goyal







Recent Posts

See All
Mirrored Truth

By Rufaida Manzoor I stood beside the silent lake, With eyes that felt no urge to break. My hair fell low in shadows deep, The waters...

 
 
 
My Antidote

By Anveeksha Reddy You fill my books with your ink, seeping into the pages bright and brilliant The words etched into the cracks of it,...

 
 
 
Avarice

By Anveeksha Reddy You tear my skin and pick on my bones I label it as gluttony for you Churning and shattering the remains of my...

 
 
 

Comments

Rated 0 out of 5 stars.
No ratings yet

Add a rating
bottom of page