दामन छोड़ दिया
By Deepika
आज उनका दामन हमने छोड़ दिया,
जिनका साथ पाने की बरसों से ख्वाइश थी;
मालूम नहीं कि मुकद्दर में यह साथ नहीं था,
या फिर उस रब की ये नुमाइश थी;
इसमें एक मेरा-मेरा हाथ नहीं था बस,
इसमें जर्रे जर्रे की साजिश थी;
आज वो मुझे सिर्फ आंखों का पानी नजर आ रहा है,
जो बरसों पहले बारिश थी।
By Deepika

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