दशहरा
By Jyoti Singh
हर दशहरा, रावण धूं-धूं कर जलता है
और हर बुराई जल कर खाक हो जाती है
लेकिन बुराई तो राम में भी थी,
अरे !! ऐसे कैसे ? भगवान् हैं वो
यह बात कभी सच नहीं हो सकती
हमारे भगवानों से कभी ग़लती नहीं हो सकती |
चलो ! रामायण का कुछ हिस्सा आज सुनाती हूँ,
और फ़िर धीरे-धीरे तुम्हें भी समझाती हूँ |
अपनी बहन की कटी नाक,
वो बर्दाश्त नहीं कर पाया था
इसीलिए , वो भाई ,
देवी सीता का हरण कर लाया था
सुंदरता पर मोहित हो,
विवाह का प्रस्ताव भी लाया था
लेकिन बिना इच्छा के,
सीता को हाथ तक नहीं लगाया था |
घमासान युद्ध हुआ, जिसमें रावण पराजित हुआ
जिससे मिलने की आस में,
सीता ने कितने दिन और रातें काटी थीं
आज उसी सियावर राम ने,
अपनी पवित्रता साबित करने को,
सीता से अग्नि परीक्षा मांगी थी
ज्यों ही सीता ने,
अग्नि से बाहर अपना कदम बढ़ाया था
राम ने अपनी पत्नी को,
सम्मान सहित अपनाया था
बड़े हर्षोल्लास का उत्सव था,घर-घर दीप जले थे
राम और जानकी, अब वापस अयोध्या की ओर चले थे
सीता के जीवन की कैसी यह अनहोनी थी
परीक्षाएं तो अभी और भी होनी थीं
क्या धोबी, क्या कहार, और क्या लोहार
उस नारी पर सबने खूब आरोप लगाए
क्या राम को इतना भी समझ नहीं आता?
कि सीता का त्याग कर दिया जाए
सीता की पवित्रता,
वो अयोध्यावासियों को समझा ना पाए
कैसे मर्यादा पुरुषोत्तम, और कैसे भगवान् राम
जो अपनी पत्नी की मर्यादा भी ना बचा पाए
त्यागकर उसे, पलभर में छोड़ दिया
जिसने राम-नाम के सिवाय कोई जाप नहीं किया
दिन बीते, साल गुज़रे
सीता के जीवन में फ़िर खुशियों का उदय हुआ
जब उनके पुत्र, लव-कुश का जन्म हुआ
भगवान् राम तक यह संदेश पहुँच गया था,
कि दो बालकों ने यज्ञ का घोड़ा पकड़ लिया था
समय का फिर आघात हुआ,
लव-कुश उनके ही पुत्र हैं,
राम को जब यह ज्ञात हुआ
एक भव्य सभा बुलाई गई,
जहाँ माता सीता भी लाई गईं
उनके मनोबल का बांध टूटकर बिखर गया
जब पिता-पुत्र के संबंध का,
प्रमाण उनसे मांगा गया
टूटी हुई जानकी , अब और भी बिखर गई
प्रमाण देते-देते, बेचारी सीता धरती में समा गई
रावण ने बेशक, सीता हरण का गुनाह किया था
पर गुनाह तो राम ने भी किया था |
फ़िर हम सिर्फ़ रावण को ही क्यों जलाते हैं?
भगवान् राम के जीवन का यह अध्याय,
क्यों जानकर भी हम भूल जाते हैं?
सत्य की असत्य पर सदा ही विजय होगी,
पर किसी दौर में तो दुनिया पूछेगी
कि तुम्हें रावण जैसा भाई चाहिए,
या फ़िर,
राम जैसा जीवनसाथी??
By Jyoti Singh

Comments