दौर-ए-जिंदगी
By Vibha Singh
दौर-ए-जिंदगी यूँ ही रवाँ है,
खवाहिशें चाहतें बेसबब बेदिशा हैं,
ना मुकम्मल सा मेरा सारा जहाँ है,
तू आएगा मिलने कभी तो,
ख्वाब ये अब भी जवां है,
दौर-ए-जिंदगी यूँ ही रवाँ हैं,
खवाहिशें चाहतें बेसबब बेदिशा हैं ।
अक्सर तनहाइओं में,
तू पास आ जाता है,
जेहन-ओ तबीयत में करके घोर अंधेरे,
मुझको मुझसे ही दूर किया है,
अब हारा हुआ दिल यूँही यहाँ है,
ख़ामोशियों में डूबा पूरा समा है,
दौर-ए-जिंदगी यूँ ही रवाँ है,
खवाहिशें चाहतें बेसबब बेदिशा हैं।
काश तेरे झूठ को सच ना माना होता,
ओ-यारा गर तूझे आना होता,
धङकनें गवाही देती मेरी,
टूटे हुए दिल के टुकड़े सीने में जमा हैं,
चोट खाई है ऐसी ,
अब होश कहाँ है,
दौर-ए-जिंदगी यूँ ही रवाँ है,
खवाहिशें चाहतें बेसबब बेदिशा हैं।।
By Vibha Singh

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