थी जरूरत ,थोड़ा प्यार करने की...
By Dr Digvijay Jadhav
जाने कहा गया वो वक्त , जब हम दिनभर साथ रहा करते थे,
रातों में तारे गिनते थे , बात किया करते थे ...
एक दूसरे का हाथ पकड़कर दुआ करते थे,
टूटते तारोंसे एक दूसरे की चाहत मांगते थे ...
कैसे पलक झपकते ही सब बदल गया ,
अपना कह कर जिसे गले लगाया था, सब पराया हो गया..
थोड़ा सोचा होता ये कहने से पहले के,
तुम्हारे ना होने से होंगा हमे एतराज कही
दुनिया की भीड़भाड़ में खोकर तुम ये भूल ही गई के,
प्यार तुमसे किया था पगली ,तुम्हारी उपलब्धि से नहीं!
पहले लगता था हमे के , कभी कमी न हों इस प्रेमबहार की,
अब पूछते हैं हम खुद से, क्या जरूरत थी इतना प्यार करने की
इतने सालोंसे जो संजोके रखा था,
एक आंधी आइ ,सब छूट गया
हीरा है तुम्हारा दिल कहती थी मुझे,
फिर इतने जल्दी कैसे टूट गया
थोड़ा कम प्यार करते तो शायद दिल के टुकड़े भी कम होते,
जोड़कर उन टुकड़ों को, शायद दर्द के एहसास भी कम होते..
लेकिन टुकड़े इतने हुए उस दिल के ,
अभितक ठीक से गिन न पाए,
इतना चाहने के बाद भी जब वो बोले के ,
तुम कभी प्यार कर ही न पाए!
फिर समेटा उन टुकड़ों को, तराशा उन्हें तुम्हारे गम से,
अलमारी मे बंद किया उन्हे, छुपा कर दुनिया की नजरो से..
बंद करके सारे टुकड़े ,
उस अलमारी पर लिख दिया नाम दिया तुम्हारा..
ताकी जब लोग पूछे तोह , तुम्हारा नाम लेके केह सके हम,
के अभितक सुरक्षित है दिल हमारा!
क्योंकि तुम चहात हो औंर रहोगी सदा हमारी ,
यू ही बदनाम ना होने देंगे...
एक क्या, सौ दिलं तोड दो लेकीन
ये चाहत कम ना होने देंगे..
नए रिश्तोंसे जब फुर्सत मिले तो किसी दिन आकर ,
उस अलमारी को खोलकर देखना तुम..
अगर जाननी है कीमत उन टूकड़ोंकी तुम्हे तो,
बेशक बाजार में बेचकर देखना तुम..
देखेंगे जब लोग उन टुकड़ों को ,
तारीफ ही करेंगे ,तोड़नेवाले की...
तब अफसोस मत करना के जिम्मेदारी तुम्हारी भी थी,
थोड़ा प्यार करने की !
खुदा करे एक दिन आए, जब तुम्हे एहसास हो,
दूर चले जाए हम, जब पूरी दुनिया तुम्हारे पास हो...
डोली तुम्हारी उठने से पहले जनाजा मेरा खास हो,
शरीर पूरा जल जाए लेकिन रुह तुम्हारे पास हो...
तानोंसे बचने के लिए हमसे दूर रहती थी तुम,
अब मुंह छिपाने की जरूरत नही होगी..
शौक से लोगोंके बीच घूमना तुम, क्योंकि, एहसास रहेगा रुह का, लेकिन लोगोंको दिखाई नही देगी..
तब गौर करना, के कोई मतलब नहीं होता लोगोंकी बातोंका
वो सिर्फ बाते होती है ,कहने सुनने की..
बेशक देर हो चुकी होंगी तुम्हे ये समझने में के,
जरूरत तुम्हे थी थोड़ा प्यार करने की ..
एहसास हो किसी दिन , पलटकर देखना मुद्दतों के बाद भी
हमारे दिल का वो ताज तुम्हारा रहेगा..
झिझकना नही किसी दिन मिलने का खयाल आए तुम्हे,
तुम हमारी रहो ना रहो , हमपर हक सिर्फ तुम्हारा रहेगा..
बिनती है ..अब जब मिलोगी ,
कोशिश करना तुम मेरे पास रहने की
हमारा तो टूट गया है ,
दिल को तुम्हारे जरूरत होंगी ,थोड़ा प्यार करने की..!
By Dr Digvijay Jadhav

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