तो मत लिखो
By Jwala
‘ग़र लिख रहे हो तुम
कि तुम भी लिख सको कोई ग्रंथ कालिदास सा
तो मत लिखो
‘ग़र लिख रहे हो तुम
कि तुम भी पा सको अमरत्व वेद व्यास सा
तो मत लिखो
‘ग़र लिख रहे हो तुम
कि तुम भी गा सको यशगान किसी सम्राट का
तो मत लिखो
‘ग़र लिख रहे हो तुम
लिए मन में भरम और स्वप्न राज-पाठ का
तो मत लिखो
‘ग़र वेदना है मर चुकी
और कर चुके हो त्याग तप और ध्यान का
तो मत लिखो
‘ग़र बस कसीदे हो पसंद
और लिख नही पाते हो सत्य आज का
तो मत लिखो
By Jwala

Comments