तैयारी।
By Abhijeet Santosh Gawande
गिर रहा हु मैं,
गिरकर बार बार संभल रहा हु मैं।
कुछ हकीकत जान ली है मैंने,
और जानने की कोशिश कर रहा हु मैं।
इंसानियत तो कही खो गयी है शायद,
इंसानियत के दुश्मनो से लढ़ रहा हु मैं।
थोड़ी सच्चाई तो जान ली है मैंने,
फिर भी मुस्कुरा रहा हु मैं।
मेरी इस मुस्कुराहट को,
मेरी कमजोरी मत समझना...ए जिंदगी,
तुझमे बसे बुरे वक़्त को हराने की,
"तैयारी" कर रहा हु मैं।
By Abhijeet Santosh Gawande

Comments