तुम्हारा मुस्कुराता चेहरा
By Avani Acharya
जब भी मैं आँखे बंद करती हूं
एक वो ही चेहरा नज़रो के सामने आ जाता है
कभी दोस्त बनकर आता है
तो कभी इश्क बनकर
कभी प्यार में ली हुई हर एक रिस्क बनकर
उसे देखकर मन करता है
उसे पास बुलाने का
उसे गले लगाने का
उसे ये समझाने का, की
हां जब जब मैं आँखें बंद करती हूं
एक तुम्हारा ही चेहरा नज़र के सामने आ जाता है
हां तुम्हारा वो मासूम चेहरा
जिसे देखा था जब पहली दफा तो डंग रह गयी थी मैं
हां तुम्हारी वो आंखें जिनमे खोने से कभी मुझे डर नही लगा
और तुम्हारे माथे के वो शिकन जिन्हें कभी मिटाना चाहती थी मैं
हां वही चेहरा जिसे मैं कभी रोज़ देखा करती थी
पर ये बात तो उन दिनों की है
जब मैं तुमसे भी अक्सर मिला करती थी
अब रह गयी है तो ये मीठी सी यादें
तुम्हारी उस हँसी की जो मेरे हर एक दर्द का मरहम बनकर
हमेशा मेरे साथ रहती है
जब भी याद आती है तुम्हारी
अपनी आँखें बंद कर लेती हूं
और तुम्हारा चेहरा फिर से एक बार मैं देख लेती हूं।
By Avani Acharya

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