तुमसे ही हूँ मैं …
By Vinayak Pratap Singh
तुम्हें देखूं तो बेचैन
तुम्हें ना देखूं तो बेचैन
माना कि तुम हो मुझसे दूर
फिर भी,
आंखें खोलूं तो मुस्काती तुम
आंखें मूँदूँ तो गुनगुनाती तुम
जागूँ तो हर ज़िक्र में तुम
सोऊं तो हर ख्वाब में तुम
मेरी हर दुआओं में तुम मेरी
हर मन्नतों में तुम
तुम अब तुम में नहीं
मेरे ‘’हम ‘’ में हो तुम
ये जो तुम हो, तो हम है
जो हम है, तो मैं हूँ
अरमान बस अब है इतना
पूरीकरूँइसहमकीहरतमन्ना
By Vinayak Pratap Singh

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