“तुम हो”
By ZafarAli Memon
तुम सुकून हो पुर-सुकून हो
मिरे इश्क़ का तुम जुनून हो
मैं होश में बाहोश में
मिरे जिस्म का तुम ख़ून हो
तुम सर्द हो बरसात भी
मिरी गर्मियों की तुम जून हो
तुम ग़ज़ल हो हो तुम शाइरी
मिरी लिखी नज़्म की धुन हो
मिरी हँसी भी तुम मिरी ख़ुशी भी तुम
मिरे इस हयात की मम्नून हो
तुम धूप हो मिरी छाँव भी
तुम सियाह रात का मून हो
तुम सिन हो तुम काफ़ भी
तुम वाओ के बाद की नून हो
तुम सुकून हो पुर-सुकून हो
मिरे इश्क़ का तुम जुनून हो
By ZafarAli Memon




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